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October 14, 2008

रवींद्र व्यास की हरियाली झलकाती अप्रतिम कलाकृतियाँ

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रवींद्र व्यास हरियाली के चितेरे हैं. ऐसे में जब मनुष्य हरियाली और पर्यावरण से दूर होता जा रहा है, वो कांक्रीट के जंगलों में हरियाली को हरता जा रहा है, तब रवींद्र व्यास की कलाकृतियाँ दर्शकों की आखों में हरियाली की तृप्ति प्रदान करती हैं. आँखों और मन को राहत मिलती है और चहुँओर हरियाली का आभास सा होता है. रवींद्र व्यास की कलाकृतियों का आधार ही हरियाली और हरा रंग है. हरे रंग के अलावा इक्का दुक्का रंग ही इनकी कलाकृतियों में झलकते हैं. रवींद्र व्यास की कलाकृतियों में भले ही एकरसता (मोनोटोनस) व एक बिंबता का अहसास यदा कदा हो जाता हो, मगर ये बात भी तय है कि आदमी हरियाली और जंगल की छटा से कभी बोर नहीं होता.  रवींद्र व्यास अपने चित्रों के माध्यम से हरियाली की अप्रतिम छटा बिखेरने में बखूबी सफल रहे हैं.

हरियाली के चितेरे रवींद्र व्यास के चुनिंदा चित्रों की प्रदर्शनी भोपाल के सरल आर्ट गैलरी में चल रही है जो 17 अक्तूबर शाम तक जारी रहेगी.

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संक्षिप्त जीवन परिचय:

इंदौर में १९६२ मे जन्म। विज्ञान में स्नातक। समाज कार्य में स्नातकोत्तर। पत्रकारिता की डिग्री हासिल की। सन् ८२ में कुछ समय तक इंदौर से ही प्रकाशित साप्ताहिक प्रभात किरण में पत्रकारिता की शुरुआत। इसके बाद फिर ८७ - ८८ में इसी अखबार में काम। ८९ में दैनिक चौथा संसार में सब एडि़टर से लेकर फीचर एडि़टर तक सफर। इसी अखबार के लिए हर साल सूर्यास्त और सूर्योदय नाम से खास परिशिष्टों का संपादन - संयोजन। यहीं पर सांस्कृतिक पत्रिका इंद्रधनुष का संपादन। सास्कृतिक कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग से लेकर साक्षात्कार। अगस्त - ८९ से दैनिक भास्कर में मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव - विशेष पन्नों का संपादन - संयोजन। यहीं साप्ताहिक पत्रिका इंदौर पोस्ट , भास्कर टुडे , वीकेंड भास्कर का संपादन।

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फरवरी - २००८ से इंदौर से प्रकाशित दैनिक अखबार नईदुनिया में डिप्टी एडिटर। यहीं पर ब्लॉगदुनिया पन्ने की शुरूआत भी की।

लघु पत्रिका आवेग , इबारत और कादम्बिनी में कहानियां प्रकाशित। कुछ कविताएं भी। अखबारों में कविता - कहानियों के लिए रेखाचित्र। पिछले आठ सालों से पेंटिंग। खासकर हरे रंग में खूब काम किया।

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बाईस साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रवींद्र व्यास साहित्य, संगीत, चित्रकला औऱ सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं। इनकी कहानी को कादिम्बिनी की तरफ से पुरस्कृत किया जा चुका है। चित्रकारी के तीन ग्रुप शो करवा चुके रवींद्र दो नेशनल आर्ट कैंपों में भागीदारी भी कर चुके हैं।

पिछले छह सालों से लगातार एक ही रंग हरे में पेंटिंग्स कर रहे हैं। इस साल चित्रों की चार एकल नुमाइश। हरा कोना इनका एक ब्लॉग भी है।

इंदौर में रहते हैं।

संपर्क:

ravindrasvyas एट gmail.com

3 टिप्पणियाँ.:

विष्णु बैरागी said...

आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) का दिन । दिन का तापमान कोई 35-36 डिग्री सेल्सियस । आश्विन मास की इस प्राणलेवा तपन में (जो, मालवा की लोकोक्तियों के अनुसार 'हिरणों को सांवला कर दे और हंसियों को गला दे') इतनी और ऐसी सघन हरियाली आंखों से मन तक उतर कर शीतलता दे गई ।
कुछ चित्र यद्यपि पहले किसी ब्‍लाग पर आ चुके हैं लेकिन सुन्‍दरता कभी पुरानी नहीं होती । वह तो नई होती है, नित नवीन, नित नूतन ।

विवेक सिंह said...

अच्छी जानकारी मिली .

डॉ .अनुराग said...

सच में ...लाज़वाब है भाई

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