कान्ति प्रकाश त्यागी की कविता : चूहे का प्रस्ताव
चूहे का प्रस्ताव
-डॉ० कान्ति प्रकाश त्यागी
एक चूहा शेरनी के पास आया
साष्टांग दंडवत कर शीश झुकाया
हे! मधुर भाषिणी, मन भाविणी
जगजामिनी,मृग नयनी
वन स्वच्छन्द विहारिणी
कामज्वर अपहारिणी
लज्जास्मित गौरांगिनी
निज स्वरूप अभिमानिनी
भावी अर्धांगिनी
भावी संतान जननी
मम प्रस्ताव विचारिणी
अबे! गोल मोल न बोल
क्या कहना, साफ़ साफ़ बोल
फ़ालतू में पहेलियां बुझा रहा है
देर से मेरा दिमाग खा रहा है
हे देवी! तेरे चरणों में, निष्काम काम से आया हूँ
सृष्टि के कल्याण हेतु, तेरा हाथ मांगने आया हूँ
प्रिय! मैं तुम्हें जीवन साथी बनाने आया हूँ
सृष्टि में, एक नया इतिहास रचाने आया हूँ
होगी संतान हमारी, चतुर एवं हृष्ट
सभी करेंगे मौज़, न होगा किसी को कष्ट
अबे बोलने से पहले, आईने में सूरत देख
शेखचिल्ली की औलाद, दिन में सपने न देख
हे! मयूर चकोरी, तू मेरी सूरत पे न जा
नौजवान की, अक्ल व हिम्मत पर जा
अबे! भागता है या बताऊं
या यहीं तेरी शादी रचाऊं
तेरी यह औकात?, औकात की क्या बात
हिम्मत ओर अक्ल चाहिए,वह मुझ में है
वधु के लिए, सौन्दर्यता व लावण्य चाहिए
इस बात से तो सहमत हो,वह तुम में है
मैं विघ्न विनायक श्री गणेश की सवारी हूँ
उन्हीं का आशीर्वाद है, उनका बहुत आभारी हूँ
आशा है, मुझे निराश नहीं करोगी
प्रेम प्रस्ताव, पुनः विचार करोगी
जल्दी नहीं, आराम से विचार करना
अपने बापू को, मेरे घर भेज देना
सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया
टाटा फिर मिलेंगे, नमस्कार महोदया
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