शिवेश श्रीवास्तव की हास्य-व्यंग्य कविता : बच्चों की पीड़ा
कविता
बच्चों की पीड़ा!
-शिवेश श्रीवास्तव
ठंड की मारी एक आधुनिक मम्मी ने
मोहल्ले की अन्य सारी मम्मियों का दल बनाया
सभी स्कूल गोइंग बच्चों की मम्मियों को
गरमागरम चाय और नाश्ते के साथ
एक अहम मुद्दे पर बातचीत के लिए
अपने घर पर बुलाया
चाय की चुस्कियों के बीच
दुखियारी मम्मी ने सभी को
संबोधित करते हुए कहा
बहनों सर्दी में बच्चों के सुबह के स्कूल का टाइम
चैंज होना चाहिए
आज से हमारा नारा है कि
कड़कड़ाती सर्दी से मम्मियों को बचाइए
सभी ममिम्यों ने अपने शॉल और स्वेटरों में हाथ
सिकोड़ते हुए कहा
हां बहन हम भी तुम्हारा समर्थन करते हैं
बच्चों के पापा लोग तो खर्राटे भरते रहते हैं
और उन्हें ठंड में स्कूल बस तक छोड़ने की मार
हम सहते हैं
बच्चों की तकलीफ का मुद्दा तो एक तरफ टल गया
सर्दी में बच्चों के स्कूल का टाइम
चैंज होने का मामला
मम्मी-पापा की लडाई का मुद्दा बन गया।
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संपर्क व परिचय:
शिवेश श्रीवास्तव
38, मोतिया पार्क
निकट चहक नर्सिंग होम भोपाल, म.प्र
परिचयः गीतकार, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन केंद्र कलाकार बाल पत्रिकाओं के संपादन का अनुभव
प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक भारस्कर में विगत 8 वर्षों से कार्यरत
सौ से भी अधिक आलेखों का प्रकाशन
3॰॰ से भी अधिक गीत-कविताओं का सृजन









1 टिप्पणियाँ.:
मुद्दा बड़ा गंभीर है हमें चाय और नाश्ता नहीं मिला फ़िर भी हम उस मीटिंग में शामिल है और उनका समर्थन करते हैं। हमारे टाइम में तो सर्दियों में स्कूल के टाइम बदल जाया करते थे पर तब स्कूल फ़ैक्टरी नहीं हुआ करते थे, स्कूल हुआ करते थे। और जहां तक पापा के सोने का स्वाल है जहां तक मुझे पता है आज कल सुबह की पहली चाय बनाने की जिम्मेदारी पापा की का फ़ैशन है, हर जगह्।