जीवन के तीन रंग
जीवन के तीन रंग
-डॉ. ओम प्रकाश एरन
(1)
धर्मराज ने राशन की दुकान पर पूछा-
उत्तर मिला “घासलेट अभी नहीं आया”
कुछ दिनों बाद पूछा उत्तर मिला-
“बीस तारीख तक आएगा”
बीस तारीख को गए तो कहा-
“कब से समाप्त हो गया, आप इतने दिन कहां थे?”
इसके बाद धर्मराज परिवार सहित
हिमालय की ओर चले गए
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(2)
कालू रोज स्कूल आता है
काश टीचर भी रोज आते
कालू को रोज मिलता है चपरासी
वह उसी से बात करता रहता है
नियमित स्कूल आने का फायदा हुआ
वह बीड़ी पीना सीख गया
एक दिन टीचर आए
कालू को बुलाया
बोले, “तू पास है
ला, एक बीड़ी मुझे भी पिला
तेरी बीड़ी कुछ खास है.”
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(3)
नेताजी खिड़की के पास बैठकर
सुस्ता रहे थे
एक कव्वा कहीं से आया
अपना परम्परागत गाना गाया
फिर नेताजी से पूछा-
“मजा आया?”
नेताजी कव्वे को भगाते हुए बोले-
“न सुर, न ताल, न अक्ल
हमारे सामने हमारी ही नकल?”
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संपर्क:
शास्त्री नगर, रतलाम, मप्र. 457001
(साभार, साप्ताहिक उपग्रह, रतलाम. चित्र – कृष्णकुमार अजनबी की कलाकृति)










1 टिप्पणियाँ.:
बडा ही करारा व्यंग ।