March 15, 2008

हमें वही लौटकर मिलता है जो हम दूसरों को देते हैं.


(श्री सी. एल. जैन की डायरी के पन्ने)

(ब्लॉग यानी ऑनलाइन डायरी लेखन से पहले हममें से बहुतों की आदत डायरी लेखन की रही है. श्री सी. एल. जैन भी वर्षों से डायरी लिखते रहे हैं. परंतु उन्होंने अपनी डायरी लेखन को अलग रंग दिया है. उनकी डायरी सूक्तियों, अनमोल विचारों, सुभाषित, सुविचार से परिपूर्ण है. दिन भर में कहीं देखा सुना पढ़ा सुविचार शाम को उनकी डायरी में नोट हो जाता है. प्रस्तुत है उनकी डायरी से ली गई कुछ सूक्तियाँ)

  • मानव जीवन की दिशा बदलने में एक छोटी सी बात भी अद्भुत प्रभाव रखती है.
  • हमें वही लौटकर मिलता है जो हम दूसरों को देते हैं.
  • अगर आपका ध्यान कहीं और है तो आप सही काम नहीं कर सकते.
  • हमें दूसरों को वही देना चाहिए जो हम स्वयं लेना पसंद करते हैं.
  • जिसने स्वयं पर गर्व किया उसका पतन अवश्य हुआ.
  • जो अपना भला बुरा नहीं देखता वह आंखों के होते हुए भी अंधा ही है.
  • सुख बंट जाए तो बढ़ता है. दुःख बंट जाए तो घटता है.
  • एक पैसे का भी कर्जदार नहीं होना अच्छी आर्थिक स्थिति व बेफ़िक्री का सूचक है.
  • विचार करके बोलना श्रेष्ठता और बोलने के बाद सोचना मूर्खता है.
  • अच्छे कार्य मृत्यु के बाद भी जीवित रहते हैं.
  • वह परिश्रम जिसका कोई उपयोगी फल नहीं निकले, नैतिक पतन का कारण होता है.
  • ईश्वर न तो काबा में है न काशी में है, वो तो घर घर में, प्रत्येक के दिल में है.
  • समय से लोहा लेने वाले ही इतिहास का निर्माण करते हैं.
  • सर्वोत्तम धर्म है सहनशीलता.
  • कभी न गिरने वाले से बार बार गिर कर ऊपर उठने वाला अधिक महान होता है.
  • संसार में सबसे सरल है आलोचना करना और सबसे कठिन है त्याग करना.
  • कार्य की अधिकता के बजाए कार्य की अनियमितता आदमी को मार डालती है.
  • असत्य विजयी हो भी जाए तो उसकी विजय अल्पकालिक होती है.
  • थोड़ा पढ़ना ज्यादा सोचना कम बोलना ज्यादा सुनना यही बुद्धिमान बनने के उपाय हैं.
  • क्रोध अफीम की तरह है. बुद्धि को मंद कर देता है और दिमाग को कुतरकर खा जाता है.
  • जीवन का आनंद बटोरने में नहीं, बांटने में है.
  • अनुभव और दंड ऐसी सीख देते हैं जो अन्य उपायों से संभव नहीं.
  • सैकड़ों हाथों से इकट्ठा करो और हजारों हाथों से बांटो.
  • ज्ञान का उदय भूलों के बीच होता है.
  • आप जितना कम बोलेंगे, आपकी बात उतनी ही अधिक सुनी जाएगी.
  • जो अपने लिए नियम नहीं बनाता उसे दूसरों के बनाए नियमों पर चलना पड़ता है.
  • सार्थक जीवन के चार तत्व हैं – प्रेम, सेवा, आनंद और आदर्शवादिता.
  • जो मनुष्य जितना छोटा होता है उतना ही ज्यादा घमंडी होता है.
  • जीवन में दो ही व्यक्ति असफल होते हैं. एक तो वे जो सोचते हैं पर करते नहीं, दूसरे वे जो करते हैं पर सोचते नहीं.
  • जो कहता है कि मैं सबकुछ जानता हूँ, उससे बड़ा मूर्ख दुनिया में दूसरा कोई नहीं है.
  • विचार करें अनेक बार निर्णय लें एक बार.
  • क्रोध मूर्खता से शुरू होता है और पश्चाताप पर खत्म होता है.
  • मुर्दे बहाव के साथ बहते हैं, जबकि जिंदा उसके विरुद्ध तैरते हैं.
  • वे बहुत गरीब हैं जिनके पास धैर्य नहीं है.
  • मनुष्य अपने विचारों से सुखी और दुःखी बनता है.
  • क्रोध मत करो वह बुद्धि को खा जाता है. चिंता मत करो वह आयु को खा जाता है. लालच मत करो वह ईमान को खा जाता है.

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5 टिप्पणियाँ.:

anitakumar said...

वाह, आप के हाथ ये डायरी कैसे लग गयी फ़िर्। बहुत ही बड़िया सूक्तियां है जी इसे हम सहेज कर रख रहे है, आप चैटिंग करना सीखे के नहीं…:)

संजय बेंगाणी said...

सुन्दर सूक्तियाँ है.

Arun Aditya said...

जो अपने लिए नियम नहीं बनाता उसे दूसरों के बनाए नियमों पर चलना पड़ता है.
satya vachan.

Rajesh Roshan said...

इन्हे बार बार लिखा जाना और बार बार पढ़ा जाना चाहिए और आत्मसात करना चाहिए - Rajesh Roshan

राज भाटिय़ा said...

रवि जी यह तो खाजना हे विचारो का ,धन्यवाद

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