March 4, 2008

देवेन्द्र पाण्डे की कविता : वणिकोपदेश


कविता

वणिकोपदेश
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- देवेन्द्र पाण्डे


जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना, जरूरत से ज्यादा कहीं जल न जाए।
मुद्रा पे हरदम बको-ध्यान रखना, करो काग-चेष्टा कि कैसे कमाएं।

बनो अल्पहारी रहे श्वान-निंद्रा , फितरत यही हो कि कैसे बचाएं॥
पूजा करो पर रहे ध्यान इतना, दुकनियां से ग्राहक कहीं टल न जाए।

दिखो सत्यवादी रहो मिथ्याचारी, प्रतिष्ठा उन्हीं की जो हैं भ्रष्टाचारी।
लल्लू कहेगा तुम्हें यह जमाना, जो कलियुग में रक्खोगे ईमानदारी॥

मिलावट करो पर रहे ध्यान इतना, खाते ही कोई कहीं मर न जाए।
नेता से सीखो मुखौटे पहनना, गिरगिट से सीखो सदा रंग बदलना।

पंडित के उपदेश सुनते ही क्यों हो, ग्यानी मनुज से सदा बचके रहना॥
करो पाप लेकिन घड़ा भी बडा़ हो, मरने से पहले कहीं भर न जाए।

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संपर्क:

SA-10/65 D-6, शांतिनगर कॉलोनी, गंज, सारनाथ, वाराणसी (उप्र)

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(चित्र - कृष्णकुमार अजनबी की कलाकृति)

3 टिप्पणियाँ.:

भोजवानी said...

कबीर सा रा रा रा रा रा रा रा रारारारारारारारा
जोगी जी रा रा रा रा रा रा रा रा रा रा री

Mired Mirage said...

बहुत बढ़िया ।
घुघूती बासूती

Anonymous said...

mujhe bahut achchhi lagi
rachana

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