कमला निखुर्पा की कविता : डोकरा जी को सलाम
कविता
डोकरा जी को सलाम
-कमला निखुर्पा
रंग- रंगीली पगड़ी सिर पे
आँखों में लरजता प्यार है।
झुर्रियों से भरा चेहरा तेरा
कहता अनुभव अपार है।
तेरे उन्मुक्त हँसी के ठहाके
हर आँगन की शान है।
ये वृद्ध-बुजुर्ग नमन तुम्हें
तू भारत की शान है।
बडी–बडी नुकीली मूँछों में
छुपी मीठी मुसकान है।
बटुआ तेरा खाली–खाली सा
पर मन सोने की खान है।
ये वृद्ध बुजुर्ग नमन तुम्हें
तू भारत की शान है।
अनजाना है गाँव तेरा
लगता है मुझको अपना- सा।
ये लहराते हरे खेत
लगता है ये इक सपना –सा ।
मरुभूमि सिंचित तेरे पसीने से
तुझको मेरा प्रणाम है।
ये वृद्ध बुजुर्ग नमन तुम्हें
तू भारत की शान है।
शायद तुझमें ही छुपा हुआ
मेरा प्यारा हिन्दुस्तान है।
तेरे गाँव की मिट्टी से ही
मेरा भारत महान है।
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डोकरा= बूढ़ा
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संपर्क:
कमला निखुर्पा
स्नातकोत्तर शिक्षिका ( हिन्दी)
केन्द्रीय विद्यालय भीलवाडा
राजस्थान
---(चित्र - रेखा श्रीवास्तव की कलाकृति)










5 टिप्पणियाँ.:
बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।
The poem is really very nice , it locate the map of india at a glance.
The poem really reflects the Indian Culture, the attitude towards the senior citizens. Highly apprecialbe & commendable effort by the poetress. Go ahead
The poem truly speaks the position of elders in indian culture. Very good & commendable effort by Mrs Kamla Nikhurpa.
The poem is as smart as its writer.