तरूण शर्मा की ग़ज़ल : सुबह का ख्वाब दिखा गया कोई...
ग़ज़ल
-तरूण शर्मा
मेरी मजार पे एक चिराग जला गया कोई
बुझती उम्मीदों को एक आस दिखा गया कोई
आज की रात बहुत बेचैन है कटती ही नही
सुबह का एक ख्वाब इसे दिखा गया कोई
एक तेरे दर्द के बीमार थे हम, मर भी गए
उसकी दवा सारे शहर को पिला गया कोई
अपना चेहरा पहचानता तो था मैं लेकिन
एक आईना कल रात मुझे दिखा गया कोई
मैं एक कागज़ को लिए सोचता ही रहा तुझको
तेरी एक तस्वीर फलक पे बना गया कोई
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संपर्क:
-तरुण शर्मा
फ़ोस्टर सिटी, सीए, यूएसए










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