Online TransLiteration powered by Girgit.Chitthajagat.in, of http://rachanakar.blogspot.com/ Disclaimer
You may also see this page in Bangla, Devanagari, Gujarati, Gurmukhi, Kannada, Malayalam, Oriya, Roman(eng), Tamil, Telugu

January 7, 2008

हृदय नारायण उपाध्याय की क्षणिकाएँ

 

क्षणिकाएँ

-हृदय नारायण उपाध्याय

1 बसन्त

कोयल ने कूका

भौंरों ने गुनगुनाया है

खिले हुए फूलों में

और निखार आया है

लगता है फिर बसन्त आया है।

 

2 दलाल

आजकल उनके अच्छे हाल हैं

क्योंकि वे सरकारी दलाल हैं।

 

3 ठेकेदार

सरकारी इमारतें गिरने को लाचार हैं

क्योंकि उनकी बुनियाद में

एक न एक ठेकेदार है।

 

4 उम्मीदवार

झुके हुए सिर और जुड़े हुए हाथों से

अपरिचितों को भी वह करता नमस्कार है

लगता है आगामी चुनाव का

वह उभरता उम्मीदवार है।

 

5 पेश से भाई

पानवाले ने दुकान पर खड़े नेताजी से कहा

पेशे से हम और आप में भाई के नाते हैं

हम पान में चूना लगाते हैं

आप लोगों को चूना लगाते हैं।

 

>>>>>>>>>>>>>>>>>> 

डॉ0 हृदय नारायण उपाध्याय

स्नातकोत्तर ​शिक्षक हिन्दी

केन्द्रीय विद्यालय आयुध निर्माणी भुसावल

जिला जलगॉंव महाराष्ट्र

1 टिप्पणियाँ.:

mehek said...

sari sundar hai,basantwali behtarin.

Post a Comment

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले)की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं....

रचनाकार में प्रकाशनार्थ हर विधा की रचनाओं का स्वागत है. अपनी या अपने रचनाकार मित्रों की रचनाएँ हिन्दी के किसी भी फ़ॉन्ट यथा - कृतिदेव, डेवलिस, श्रीलिपि, शुषा, वेबदुनिया, जिस्ट-आईएसएम, लीप या किसी भी अन्य फ़ॉन्ट में पेजमेकर या एमएस वर्ड फ़ाइल के रूप में अपनी रचना ई-मेल के जरिए rachanakar@gmail.com .के पते पर भेजें. विस्तृत जानकारी बाजू पट्टी में देखें. आप अपनी रचनाओं के सस्वर ऑडियो/वीडियो पाठ की सीडी भी प्रकाशनार्थ भेज सकते हैं जिन्हें कुछ इस तरह [ देखने के लिए इस कड़ी/लिंक पर क्लिक करें] प्रकाशित किया जा सकेगा. ......................