हृदय नारायण उपाध्याय की क्षणिकाएँ
क्षणिकाएँ
-हृदय नारायण उपाध्याय
1 बसन्त
कोयल ने कूका
भौंरों ने गुनगुनाया है
खिले हुए फूलों में
और निखार आया है
लगता है फिर बसन्त आया है।
2 दलाल
आजकल उनके अच्छे हाल हैं
क्योंकि वे सरकारी दलाल हैं।
3 ठेकेदार
सरकारी इमारतें गिरने को लाचार हैं
क्योंकि उनकी बुनियाद में
एक न एक ठेकेदार है।
4 उम्मीदवार
झुके हुए सिर और जुड़े हुए हाथों से
अपरिचितों को भी वह करता नमस्कार है
लगता है आगामी चुनाव का
वह उभरता उम्मीदवार है।
5 पेश से भाई
पानवाले ने दुकान पर खड़े नेताजी से कहा
पेशे से हम और आप में भाई के नाते हैं
हम पान में चूना लगाते हैं
आप लोगों को चूना लगाते हैं।
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डॉ0 हृदय नारायण उपाध्याय
स्नातकोत्तर शिक्षक हिन्दी
केन्द्रीय विद्यालय आयुध निर्माणी भुसावल
जिला जलगॉंव महाराष्ट्र












1 टिप्पणियाँ.:
sari sundar hai,basantwali behtarin.
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