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November 20, 2007

युवक- युवती सम्मेलन

कविता 

  art - dolls

-डॉ० कान्ति प्रकाश त्यागी

 

कुछ लड़के और लड़कियों के

मम्मी और पाप आपस में मिले

एक ने दूसरे को, दूसरे ने तीसरे को

उचित वर तथा वधु के चर्चे करे

उनमें से किसी चतुर ने , एक बात बताई

प्रापर्टी डीलर से मिलने की सलाह सुझाई

 

एक भाई भड़क पड़े

क्यों भैया !, लड़के , लडकियां

क्या प्रापर्टी हैं ?. जो

प्रापर्टी डीलर से मिलें

कई बार ठोंक ठोंक कर

मोल तोल किया जाता है

ब्रोकर यानी बिचोलिए का

अपना ही रोल होता है

अधिक बोली लगने पर

मुंह मांगा मूल्य न मिलने पर

फौरन पुराने ग्राहक से

रिश्ता तोड़ दिया जाता है

नया ग्राहक ढूंढा जाता है

यह प्रापर्टी से कैसे कम है

अब तो लगा बात में दम है

 

वे प्रापर्टी डीलर के तो नहीं ,

मैरेज़ डीलर के पास गए

डीलर ने रजिस्ट्रेशन के नाम

काफ़ी अच्छे पैसे धरवाए

लड़के लडकी को , १५ दिन का रेपिड

इंटरव्यू फ़ेस करने के नुस्ख़े समझाए

पर्सन्लटी डेवलप्मेन्ट के नाम पर

सेंडविच कोर्स में काफी पैसे धरवाए

भारी भरकम फ़ीस देने के बाद भी

जब शादी की बात नहीं बन पाई

तब अपना ही धंधा चलाने की

एक नई योज़ना बनाई

 

रविवार के सभी प्रमुख

अख़बारों में दे दिया

धांसू बड़ा विज्ञापन

आपके शहर में पहली बार

विवाह योग्य युवक - युवतियों

का विराट परिचय सम्मेलन

युवक युवतियों का

ठहरने का भव्य प्रबन्ध

ममी - पापा भी आकर देख़ें

होनेवाले नए सम्बन्ध

दहेज़ लेने वाले

दहेज़ देने वाले

दहेज़ न देने वाले

दहेज़ न लेने वाले

माता पिता का

वर्गीकरण किया जायेगा

प्रत्येक को गाइड दिया जायेगा

 

विज्ञापन का जबरदस्त असर हुआ

परिचय हाल था खचाखच भरा हुआ

एक लड़के की मम्मी का

लड़की के पापा से परिचय हुआ

बातों ही बातों में दहेज़ का

अच्छा सा खुलासा हुआ

लड़की के पापा ने कहा

मेरे पास बंगले , कारें

नौकर , चाकर , दूकान मकान

ज़मीन , ज़ायदाद सभी कुछ है

 

अगर नहीं है तो बस एक दामाद

क्या कोई कर सकता है

मेरी बिटिया की

ज़िन्दगी आबाद

दहेज़ मुंह मांगा दे सकता हूँ

जो चाहे , कर सकता हूँ

क्या आपके लड़के से , अपनी

लड़की की शादी की

अपेक्षा कर सकता हूँ

 

लड़की लड़के के सवाल ज़बाब

में कुछ मेल नहीं खा पाई

अतः बात चाय पानी से

आगे बढ़ ही नहीं पाई

अधिकतर प्रश्न और उत्तर

निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे

ब्रोकर ने भी समझाया

परन्तु सभी प्रयत्न बेकार थे

 

मम्मी ने कहा , तुम्हे लड़की पसन्द नहीं

पर मुझे लड़की के पापा पसन्द हैं

मम्मी थोड़ा शरमाई

कहने में सकुचाई

दांए पैर का अंगूठा

ज़मीन पर घिसा

साड़ी का पल्लू

दांतों में भींचा

बेटा !, इस दौड़धूप में

हमें काफी चपत लग गया

काम वहीं का वहीं

धरा रह गया

लड़की के पापा पैसे वाले हैं

हम सब दिल वाले हैं

क्यों ने हम सब मिल कर

एक ही घर बना लें

 

इस तरह अपनी

समस्या का हल निकाले

लड़के को मम्मी की बात भाई

मम्मी की पापा से कराई सगाई

ब्रोकर बोला , मेरी फ़ीस भाई

क्यूं ?. तेने क्या मदद कराई

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रचनाकार संपर्क : k.p.tyagi@gmail.com

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